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तआर्रुफ़:

ग़ज़ल चिराग़-ए-उम्मीद इंसानी जज़्बात, तन्हाई, मोहब्बत और उम्मीद की वह दुनिया पेश करती है जहाँ हर शख़्स ज़िन्दगी के तूफ़ानों से गुज़रता है, मगर फिर भी अपने दिल में रोशनी का एक चिराग़ जलाए रखता है। शायर ने हालात की सख़्ती, रिश्तों की नर्माहट, ज़मीर की जागृति और जुनूँ की ताक़त को बेहतरीन अंदाज़ में बयान किया है। हर शेर एक तजुर्बा, एक दर्द और एक नई सीख को अपने अंदर समेटे हुए है। ग़ज़ल का सफ़र मुश्किल राहों से गुज़रकर उस मुक़ाम तक पहुँचता है जहाँ उम्मीद, हिम्मत और मुहब्बत इंसान को सँभालती है। यह ग़ज़ल दिलों को छूती है, रोशनी देती है और इंसान को उसकी असल क़ीमत याद दिलाती है।

ग़ज़ल: चिराग़-ए-उम्मीद

मतला

चेहरों पे गर्द-ए-अलम का साया है,
कोई तो चिराग़-ए-उम्मीद जलाया है।

मोहब्बतों का शहर है मगर अजनबी बहुत,
हज़ार बार दिल को यहाँ ज़ख़्म लगाया है।

ख़्वाबों की उजली राह में काँटे भी थे बहुत,
फ़क़त अपने हौसले से मंज़िल को पाया है।

किसे ख़बर थी मौसम इतना बदल जाएगा,
कि हमने घर का दिया भी आँधियों में जलाया है।

शहर में हर तरफ़ ख़लिश का समंदर क्यों है?
किसी ने शायद रिश्तों का सच भुलाया है।

दुनिया की भीड़ में हम यूँ अकेले पड़ गए,
जैसे किसी ने जान-बूझकर हमें भुलाया है।

मोहब्बतें भी तो हालात से डर जाती हैं,
मगर किसी ने जुनूँ से इश्क़ निभाया है।

मकान तो बहुत हैं, घर नहीं बन पाते,
क्योंकि किसी ने रिश्तों में दिल न लगाया है।

जुनूँ की राह में मुश्किल बहुत दिखाई दी,
मगर किसी ने हौसले से रास्ता बनाया है।

ज़मीर जागे तो मिटते हैं अंधेरे अक्सर,
मगर किसी ने दिल को सच से जगाया है।

अदावतों ने जहाँ दीवारें खड़ी कर दी थीं,
किसी ने ख़ुलूस से फिर दिल को मनाया है।

मक़ता

क़बीर, दुनिया में तूफ़ान बहुत उठे लेकिन,
तेरी बातों ने उम्मीद का दीया जलाया है।

ख़ातमा:

ग़ज़ल चिराग़-ए-उम्मीद का ख़ातमा इंसानी जज़्बे, उम्मीद और हौसले की जीत पर ख़त्म होता है। तूफ़ानों और अंधेरों से लड़ते हुए भी वह दिल जो सच, मोहब्बत और उम्मीद का दामन नहीं छोड़ता, आख़िरकार रोशनी की राह पा ही लेता है। आख़िरी मक़ते में “क़बीर” की आवाज़ इंसानियत और हिम्मत की पुकार बनकर उभरती है—कि चाहे दुनिया में कितने ही तूफ़ान क्यों न उठें, उम्मीद का दीया अगर जलता रहे तो कोई भी अंधेरा इंसान को शिकस्त नहीं दे सकता। यह ग़ज़ल पाठक के दिल में भरोसा, राहत और एक नई ताज़गी छोड़ती है, और यह एहसास दिलाती है कि हालात चाहे जैसे भी हों, इंसान का हौसला हमेशा उससे बड़ा होता है।

कठिन उर्दू शब्दों के अर्थ आसान हिंदी में:

गर्द-ए-अलम (ग़म की धूल), साया (छाया), चिराग़ (दीपक), उम्मीद (आशा), अजनबी (अपरिचित), ज़ख़्म (घाव), उजली (रोशन), फ़क़त (सिर्फ़), मंज़िल (गंतव्य), आँधियाँ (तेज़ हवाएँ), ख़लिश (टीस), समंदर (सागर), जुनूँ (दीवानगी/जोश), इश्क़ (मोहब्बत), ज़मीर (अंतरात्मा), अदावत (दुश्मनी), ख़ुलूस (सच्चाई), मक़ता (ग़ज़ल का आख़िरी शेर), दीया (चिराग़), हौसला (साहस), ख़ातमा (अंत), जज़्बा (भावना), नर्माहट (कोमलता), सख़्ती (कठोरता), सफ़र (यात्रा), तजुर्बा (अनुभव)।