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🌙 तआर्रुफ़:

“नाम-ए-वफ़ा” मोहब्बत, एहसास और रूहानी रिश्तों की वो ग़ज़ल है, जिसमें दिल की रौशनी का हर सरचश्मा एक ही शख़्स से जुड़ा हुआ महसूस होता है। इस ग़ज़ल में इश्क़ की नफ़ासत, तलाश-ए-वफ़ा, और मोहब्बत के हर नर्म लहजे को बड़े सलीक़े से बयान किया गया है। हर शेर दिल की गहराईयों से उठती उस पुकार को दर्शाता है, जो अपने मेहबूब की मुस्कुराहट को जहाँ की रौशनाई मानती है। इसमें मोहब्बत की सादगी भी है और वफ़ा की गरमाहट भी। शायर ने जज़्बात को ऐसी नरमी से पिरोया है कि हर मिसरा दिल की दस्तक-सा महसूस होता है। यह ग़ज़ल उन लोगों के लिए है जो इश्क़ को इबादत समझते हैं।

ग़ज़ल: नाम-ए-वफ़ा

मतला

दिल की जो रौशनी है, वो तुम्हारी वजह से है,
अब नज़रों को यूँ झुकाने की ज़रूरत क्या है।

तेरी मोहब्बत का ही सहारा है उम्र भर,
फिर ख़्वाबों में डूब जाने की ज़रूरत क्या है।

तू रूठे तो दुनिया भी उजड़-सी लगे हमें,
फिर दिल को कुछ बहलाने की ज़रूरत क्या है।

तू मुस्कुरा दे बस, तो जहाँ खिल उठे जनाब,
फिर मौसम के बदल जाने की ज़रूरत क्या है।

तू साथ हो तो रात भी उजली लगे हमें,
फिर चाँद के झिलमिलाने की ज़रूरत क्या है।

धड़कन में तेरी याद का मंज़र है हर तरफ़,
इन लम्हों को खो जाने की ज़रूरत क्या है।

तूने जो छू लिया तो मेरी रूह महक उठी,
फिर और किसी को पाने की ज़रूरत ही क्या है।

तेरी तरफ़ से रस्म-ए-वफ़ा जारी रहे सदा,
फिर दिल को भी समझाने की ज़रूरत क्या है।

तेरी नज़र का जादू ही काफी है मेरे लिए,
फिर दिल को बहक जाने की ज़रूरत क्या है।

तेरी हिफ़ाज़त में ही गुलशन ये महफ़ूज़ है,
फिर काँटों को आज़माने की ज़रूरत क्या है।

तू है तो ये ज़माने भी हसीं लगते हैं मुझे,
अब ख़ुद को भी समझाने की ज़रूरत क्या है।

मक़ता

कबीर का हर फ़साना तेरी यादों से ही दमकता है,
फिर दिल को यूँ उजड़ जाने की ज़रूरत क्या है।

🌙 ख़ातिमा:

“नाम-ए-वफ़ा” का सफ़र वहाँ आकर मुकम्मल होता है जहाँ मोहब्बत अपनी शिद्दत के साथ सुकून भी बख़्शती है। इस ग़ज़ल के हर शेर में इश्क़ का वो पाक रिश्ता झलकता है जो दिलों को जोड़ता है, तन्हाई को मिटाता है और इंसान को उसके ख़ुद के किरदार से रूबरू कराता है। मक़्ते में शायर ने बेहद खूबसूरती से ये इज़हार किया है कि उसके हर फ़साने की रौशनी सिर्फ़ उसी शख़्स की यादों से है, जो उसकी ज़िंदगी का असल सहारा है। यह ग़ज़ल मोहब्बत की उस दुनिया को सलाम पेश करती है जहाँ वफ़ा सरचश्मा है और दिल की नर्मी उसका असली रंग। यह इश्क़ का फ़लसफ़ा भी है और रूह की ज़ुबान भी।

उर्दू शब्दों के आसान हिंदी अर्थ:

मोहब्बत–प्यार, एहसास–महसूस, रूहानी–आत्मिक, रौशनी–उजाला, सरचश्मा–वजह/स्रोत, नफ़ासत–नर्मी/बारीकी, तलाश-ए-वफ़ा–सच्चाई की खोज, लहजा–अंदाज़, सलीक़ा–अच्छा तरीका, मेहबूब–प्रिय व्यक्ति, रौशनाई–उजाला, सादगी–सरलता, गरमाहट–अपनापन, जज़्बात–भावनाएँ, नरमी–कोमलता, मिसरा–पंक्ति, इबादत–पूजा, उजड़–बर्बाद, मंज़र–दृश्य, रूह–आत्मा, रस्म-ए-वफ़ा–वफ़ादारी की परंपरा, महफ़ूज़–सुरक्षित, काँटे–मुश्किलें, दमकता–चमकता, शिद्दत–गहराई, तन्हाई–अकेलापन, रूबरू–आमने-सामने, फ़साना–कहानी, फ़लसफ़ा–दर्शन/विचार, ज़ुबान–भाषा