तसव्वुर का करार: एक ग़ज़ल
तआर्रुफ़: “तसव्वुर का करार” एक रूहानी सफ़र है—मोहब्बत, तन्हाई, और यादों के उस मंज़र से, जहाँ जज़्बात सुकून बनकर उभरते हैं और अफ़साने चुपचाप महकते हैं। इस ग़ज़ल में हर…
तआर्रुफ़: “तसव्वुर का करार” एक रूहानी सफ़र है—मोहब्बत, तन्हाई, और यादों के उस मंज़र से, जहाँ जज़्बात सुकून बनकर उभरते हैं और अफ़साने चुपचाप महकते हैं। इस ग़ज़ल में हर…
🌙 तआर्रुफ़: “वफ़ा से फ़ासला” एक दिल छू लेने वाली ग़ज़ल है जो मोहब्बत के उन लम्हों को बयान करती है जब वफ़ा, तन्हाई और शिकवा एक ही साँस में…
🌙 तआर्रुफ़: “चराग़-ए-हिज्र” एक दिल को छू लेने वाली ग़ज़ल है, जिसमें मोहब्बत की मासूम तासीर, जुदाई की सिसकियाँ, और यादों की शिद्दत बड़ी शाइस्तगी से बयान की गई हैं।…
🌸 तआर्रुफ़: “तसव्वुर-ए-यार” एक रूहानी ग़ज़ल है जो यादों, एहसासों और मोहब्बत की नरमी को इज़ाफ़ती अल्फ़ाज़ के ज़रिए बेहद ख़ूबसूरती से बयान करती है। इसमें हिज्र और वस्ल के…
🌙 तआर्रुफ़: “तन्हा लम्हे” एक ऐसी ग़ज़ल है जो जुदाई की ख़ामोश चीख़ों, टूटे हुए लम्हों और महबूब की गैर-मौजूदगी में दिल पर गुज़रने वाली कैफ़ियत को शायरी की ज़ुबान…
🌸 तआर्रुफ़ “रस्म-ए-वफ़ा” एक एहसासी ग़ज़ल है जो मोहब्बत की मासूमियत, शिकस्त और खामोश तड़प को बयान करती है। इसमें आशिक़ की बेबसी, वफ़ादारी और तन्हाई की लहरें साफ़ झलकती…
🖋️ तआर्रुफ़ (प्रस्तावना): “अमल की आवाज़” सिर्फ़ एक ग़ज़ल नहीं, बल्कि सच्चाई की वो बुलंद सदा है जो समाज के हर कोने में इंसाफ़, बराबरी और जागरूकता की रोशनी फैलाती…
🟢 तआर्रुफ़: “ग़म की मुस्कान” एक दिल को छू लेने वाली ग़ज़ल है, जो जज़्बातों के उन पहलुओं को छूती है, जो अक्सर दिल की तहों में दबे रह जाते…
🖋️ तआर्रुफ़ (प्रस्तावना): ग़ज़ल “सेब के फ़ायदे” एक रचनात्मक प्रयास है जो कुदरत की इस बेहतरीन नेमत — सेब — के गुणों को शायरी की ज़ुबान में बयाँ करती है।…
🖋️ तआर्रुफ़ (प्रस्तावना): “ज़ुल्म की रवानी” एक दर्द से भरी ग़ज़ल है जो आज के समाज में फैले ज़ुल्म, अन्याय और मज़हबी तंगदिली को बयां करती है। हर शेर एक…