लम्हा-ए-क़ुर्बत: एक ग़ज़ल
🌸 तआर्रुफ़: “लम्हा-ए-क़ुर्बत” एक रूहानी और दर्द-भरी ग़ज़ल है, जिसमें मोहब्बत की क़रीबियों के बावजूद जुदाई की चुभन साफ़ महसूस होती है। हर शेर एक अधूरे एहसास का आइना है—जहाँ…
🌸 तआर्रुफ़: “लम्हा-ए-क़ुर्बत” एक रूहानी और दर्द-भरी ग़ज़ल है, जिसमें मोहब्बत की क़रीबियों के बावजूद जुदाई की चुभन साफ़ महसूस होती है। हर शेर एक अधूरे एहसास का आइना है—जहाँ…
तआर्रुफ़: “बंदा-ए-ख़ुद्दार की तलाश” एक ऐसी ग़ज़ल है जो आज़ादी-ए-फ़िक्र, उसूलों की पाबंदी और ज़मीर की आवाज़ को तलाशती है। यह शायरी उस दौर की तस्वीर पेश करती है जहाँ…
तआर्रुफ़ : “रुका सा सिलसिला” एक दर्द-ओ-ख़ामोशी से लिपटी हुई ग़ज़ल है, जो जुदाई, तन्हाई और बदलते रिश्तों के एहसासात को बड़े शाइराना अंदाज़ में बयाँ करती है। इस ग़ज़ल…