चिराग़-ए-उम्मीद: एक ग़ज़ल

तआर्रुफ़: ग़ज़ल चिराग़-ए-उम्मीद इंसानी जज़्बात, तन्हाई, मोहब्बत और उम्मीद की वह दुनिया पेश करती है जहाँ हर शख़्स ज़िन्दगी के तूफ़ानों से गुज़रता है, मगर फिर भी अपने दिल में…

ज़ुल्म की वीरानी

ज़ुल्म की वीरानी पर ग़ज़ल – ग़ज़ल: “ज़ुल्म की वीरानी को ग़म-ए-दिलख्वे ना दे” ज़न्नत-ए-कश्मीर को ज़ुल्म-ए-सियाह का सितम-ए-सहे ना दे, बेगुनाहों के ख़ून से फ़र्द-ए-ख़ुदा को ग़म-ए-दिलख्वे ना दे।…