अमल की आवाज़: एक ग़ज़ल

🖋️ तआर्रुफ़ (प्रस्तावना): “अमल की आवाज़” सिर्फ़ एक ग़ज़ल नहीं, बल्कि सच्चाई की वो बुलंद सदा है जो समाज के हर कोने में इंसाफ़, बराबरी और जागरूकता की रोशनी फैलाती…

इंसाफ़ की सुबह: एक ग़ज़ल

🖋️ तआर्रुफ़ (प्रस्तावना): “इंसाफ़ की सुबह” एक जागरूकता से लबरेज़ ग़ज़ल है, जो आज़ाद मुल्क की जकड़ी हुई इंसाफ़ी रूह की चीख़ को लफ़्ज़ों में ढालती है। इसमें लिंचिंग, सियासी…