“क़ुर्बानी-ए-हक़”: एक ग़ज़ल

तआर्रुफ़  ग़ज़ल “क़ुर्बानी-ए-हक़” क़ुर्बानी के असल मतलब को बयाँ करती है, जो सिर्फ़ जान देने तक सीमित नहीं। ये दिल के नफ़्स और शैताँ से लड़ने की बात करती है। शायर…