नूर-ए-नज़र: एक ग़ज़ल

🖋️ तआर्रुफ़: “नूर-ए-नज़र” मोहब्बत और अकीदत की उस मंज़िल की ग़ज़ल है जहाँ अल्फ़ाज़ सज़दा करते हैं और एहसास इबादत बन जाते हैं। इसमें “क़बीर” ने रूह को छू लेने…

तेरे बाद की ज़िंदगी: एक ग़ज़ल

🖋️ तआर्रुफ़ (Taarruf): “तेरे बाद की ज़िंदगी” एक रूहानी ग़ज़ल है जो मोहब्बत के उस अधूरे सफ़र की दास्तान कहती है जहाँ महबूब तो चला गया, मगर दिल उसका दीवाना…