रौशनी-ए-ग़म: एक ग़ज़ल

तआर्रुफ़ “ग़ज़ल: रौशनी-ए-ग़म” मोहब्बत और ग़म की दोहरी दुनिया का आईना है। इसमें शायर ने इश्क़ की चाशनी और दर्द की तल्ख़ी को नफ़ासत से बयाँ किया है। हर शेर…