नाम-ए-वफ़ा: एक ग़ज़ल
🌙 तआर्रुफ़: “नाम-ए-वफ़ा” मोहब्बत, एहसास और रूहानी रिश्तों की वो ग़ज़ल है, जिसमें दिल की रौशनी का हर सरचश्मा एक ही शख़्स से जुड़ा हुआ महसूस होता है। इस ग़ज़ल…
🌙 तआर्रुफ़: “नाम-ए-वफ़ा” मोहब्बत, एहसास और रूहानी रिश्तों की वो ग़ज़ल है, जिसमें दिल की रौशनी का हर सरचश्मा एक ही शख़्स से जुड़ा हुआ महसूस होता है। इस ग़ज़ल…
तआर्रुफ़: “ग़ज़ल: ग़म-ए-जानाँ” मोहब्बत और जुदाई की तसवीर है। इसमें दिल की तड़प, यादों की महक और तन्हाई की तल्ख़ियाँ बड़ी नफ़ासत से बयान की गई हैं। हर शेर में…
तआर्रुफ़ “ग़ज़ल: रौशनी-ए-ग़म” मोहब्बत और ग़म की दोहरी दुनिया का आईना है। इसमें शायर ने इश्क़ की चाशनी और दर्द की तल्ख़ी को नफ़ासत से बयाँ किया है। हर शेर…
तआर्रुफ़: “ग़ज़ल: ज़िक्र-ए-वफ़ा” मोहब्बत और वफ़ादारी की हसीन तर्जुमानी है। इसमें शायर ने इश्क़ की गहराइयों को अपने अल्फ़ाज़ के ज़रिये जज़्बात का रंग दिया है। हर शेर दिल की…
तआर्रुफ़: “नग़्मा-ए-फ़िरदौस” ग़ज़ल इश्क़, तन्हाई और रूहानी जज़्बात का एक हसीन मरकज़ है। ‘नग़्मा-ए-फ़िरदौस’ में शायर ने आँखों में बसे ख़्वाबों से लेकर दिल की वीरानियों तक हर एहसास को…
तआर्रुफ़: “ग़ज़ल: वादों के बाद” मोहब्बत की उस हक़ीक़त को बयान करती है जहाँ तसव्वुर के मीठे मौसम हक़ीक़त की तन्हाई में बदल जाते हैं। इसमें शायर ने अपने जज़्बात…
तआर्रुफ़: “ज़बाँ-ए-वफ़ा” एक रूमानी और जज़्बाती ग़ज़ल है, जिसमें इश्क़, जुदाई और यादों की नर्म तासीर को शायराना लफ़्ज़ों में पिरोया गया है। मतले से लेकर मक़ते तक हर शेर…
तआर्रुफ़: “अफ़साना-ए-ग़म” एक ऐसी ग़ज़ल है जो मोहब्बत की हक़ीक़त और तसव्वुर के दरमियान छुपे फ़ासलों को बयान करती है। इसमें दिल-ए-नादाँ की मासूम उम्मीदें, साया-ए-ख़्वाब की नर्मी और उजाले…
📜 तआर्रुफ़: “सच्चा सुख़न” एक एहसासों से भरी ग़ज़ल है जो वफ़ा की तलाश में भटके दिल की दास्तान बयाँ करती है। इसमें मोहब्बत की सच्चाई, रिश्तों की हक़ीक़त और…
🌙 तआर्रुफ़: “वफ़ा से फ़ासला” एक दिल छू लेने वाली ग़ज़ल है जो मोहब्बत के उन लम्हों को बयान करती है जब वफ़ा, तन्हाई और शिकवा एक ही साँस में…