तसव्वुर का करार: एक ग़ज़ल

 तआर्रुफ़: “तसव्वुर का करार” एक रूहानी सफ़र है—मोहब्बत, तन्हाई, और यादों के उस मंज़र से, जहाँ जज़्बात सुकून बनकर उभरते हैं और अफ़साने चुपचाप महकते हैं। इस ग़ज़ल में हर…

रस्म-ए-वफ़ा: एक ग़ज़ल

🌸 तआर्रुफ़ “रस्म-ए-वफ़ा” एक एहसासी ग़ज़ल है जो मोहब्बत की मासूमियत, शिकस्त और खामोश तड़प को बयान करती है। इसमें आशिक़ की बेबसी, वफ़ादारी और तन्हाई की लहरें साफ़ झलकती…

सदा-ए-जफ़ा: एक ग़ज़ल

🖋️तआर्रुफ़: ग़ज़ल “सदा-ए-जफ़ा” मोहब्बत की उन हकीकतों को बेनक़ाब करती है जो अक्सर सिर्फ़ अल्फ़ाज़ों में रह जाती हैं। शायर “क़बीर” ने अपने अशआरों में उन जज़्बातों को पिरोया है…