“दाद और दर्द”: एक ग़ज़ल
तआर्रुफ़: ग़ज़ल “दाद और दर्द” एक ऐसे शख़्स की कहानी बयाँ करती है जो महफ़िलों की चकाचौंध में तनहा रह गया। इस ग़ज़ल में हर शेर उस दर्द को आवाज़…
तआर्रुफ़: ग़ज़ल “दाद और दर्द” एक ऐसे शख़्स की कहानी बयाँ करती है जो महफ़िलों की चकाचौंध में तनहा रह गया। इस ग़ज़ल में हर शेर उस दर्द को आवाज़…