रंग-ए-रज़ा: एक ग़ज़ल

🖋️ तआर्रुफ़ (Introduction): “रंग-ए-रज़ा” एक सूफ़ियाना और रूहानी अहसास से लबरेज़ ग़ज़ल है, जिसमें शायर ने ज़िंदगी के ग़मों, शिकस्तों और बदनसीबियों को खुदा की रज़ा में बदलते देखा है।…