इशारों की ज़बान: एक ग़ज़ल
तआर्रुफ़ (Introduction): “इशारों की ज़बान” एक रूहानी ग़ज़ल है जो उन अहसासों को आवाज़ देती है जो लफ़्ज़ों से परे हैं। इसमें सुकूत-ए-नज़र, तर्ज़-ए-बयाँ, और अक्स-ए-जुनूँ जैसे इज़ाफ़ती अल्फ़ाज़ के…
तआर्रुफ़ (Introduction): “इशारों की ज़बान” एक रूहानी ग़ज़ल है जो उन अहसासों को आवाज़ देती है जो लफ़्ज़ों से परे हैं। इसमें सुकूत-ए-नज़र, तर्ज़-ए-बयाँ, और अक्स-ए-जुनूँ जैसे इज़ाफ़ती अल्फ़ाज़ के…