नग़्मा-ए-फ़िरदौस: एक ग़ज़ल

तआर्रुफ़: “नग़्मा-ए-फ़िरदौस” ग़ज़ल इश्क़, तन्हाई और रूहानी जज़्बात का एक हसीन मरकज़ है। ‘नग़्मा-ए-फ़िरदौस’ में शायर ने आँखों में बसे ख़्वाबों से लेकर दिल की वीरानियों तक हर एहसास को…

ज़बाँ-ए-वफ़ा: एक ग़ज़ल

तआर्रुफ़: “ज़बाँ-ए-वफ़ा” एक रूमानी और जज़्बाती ग़ज़ल है, जिसमें इश्क़, जुदाई और यादों की नर्म तासीर को शायराना लफ़्ज़ों में पिरोया गया है। मतले से लेकर मक़ते तक हर शेर…