अफ़साना-ए-ग़म: एक ग़ज़ल

तआर्रुफ़: “अफ़साना-ए-ग़म” एक ऐसी ग़ज़ल है जो मोहब्बत की हक़ीक़त और तसव्वुर के दरमियान छुपे फ़ासलों को बयान करती है। इसमें दिल-ए-नादाँ की मासूम उम्मीदें, साया-ए-ख़्वाब की नर्मी और उजाले…

इज़हार-ए-खौफ़: एक ग़ज़ल

🖋️  तआर्रुफ़: ग़ज़ल “इज़हार-ए-खौफ़” जज़्बातों की उस नाज़ुक सरहद पर खड़ी है जहाँ मोहब्बत तो है, लेकिन बयान करने का हौसला नहीं। हर शेर दिल के उस दर्द को उभारता…