मोहब्बत के साए: एक ग़ज़ल
तआर्रुफ़: “ग़ज़ल: मोहब्बत के साए” इश्क़ की गहराइयों और जज़्बात की नज़ाकत का आईना है। इसमें दिल की तड़प, तन्हाई का असर और यादों की ख़ुशबू बड़ी नफ़ासत से पिरोई…
तआर्रुफ़: “ग़ज़ल: मोहब्बत के साए” इश्क़ की गहराइयों और जज़्बात की नज़ाकत का आईना है। इसमें दिल की तड़प, तन्हाई का असर और यादों की ख़ुशबू बड़ी नफ़ासत से पिरोई…