ग़म-ए-जानाँ: एक ग़ज़ल
तआर्रुफ़: “ग़ज़ल: ग़म-ए-जानाँ” मोहब्बत और जुदाई की तसवीर है। इसमें दिल की तड़प, यादों की महक और तन्हाई की तल्ख़ियाँ बड़ी नफ़ासत से बयान की गई हैं। हर शेर में…
तआर्रुफ़: “ग़ज़ल: ग़म-ए-जानाँ” मोहब्बत और जुदाई की तसवीर है। इसमें दिल की तड़प, यादों की महक और तन्हाई की तल्ख़ियाँ बड़ी नफ़ासत से बयान की गई हैं। हर शेर में…