वादों के बाद: एक ग़ज़ल

तआर्रुफ़: “ग़ज़ल: वादों के बाद” मोहब्बत की उस हक़ीक़त को बयान करती है जहाँ तसव्वुर के मीठे मौसम हक़ीक़त की तन्हाई में बदल जाते हैं। इसमें शायर ने अपने जज़्बात…