तआर्रुफ़:
“ग़ज़ल: मोहब्बत के साए” इश्क़ की गहराइयों और जज़्बात की नज़ाकत का आईना है। इसमें दिल की तड़प, तन्हाई का असर और यादों की ख़ुशबू बड़ी नफ़ासत से पिरोई गई है। हर शेर मोहब्बत की रोशनी और जुदाई की तल्ख़ी को पेश करता है। ग़ज़ल का हर मिसरा दिल में उतरने वाला है और श्रोताओं को मोहब्बत के उन सायों में ले जाता है, जहाँ चाहत और दर्द एक-दूसरे से जुदा नज़र नहीं आते। यह ग़ज़ल न सिर्फ़ दिल को छूती है बल्कि सुनने वालों के दिल में मोहब्बत का असर छोड़ जाती है। मशायरे में पेश की जाने वाली यह ग़ज़ल हर अहल-ए-ज़ौक़ के दिल को गहराई से छूने की क़ाबिलियत रखती है।
ग़ज़ल: मोहब्बत के साए
मतला
तेरी आँखों का समंदर है ग़ज़ब का सहारा,
जिसमें डूबे जो कभी, फिर किनारे आते नहीं।
दिल में उठते हैं हज़ारों कुछ सवालात मगर,
उन सवालों के हम को अब जवाब मिल पाते नहीं।
तेरी यादों का असर आज भी बाक़ी है यहाँ,
हम कहीं जाएँ तो तन्हाई से बच पाते नहीं।
तेरे चेहरे की वो मासूम सी शफ़्फ़ाफ़ हँसी,
आईने वाले भी उस नूर को दिखलाते नहीं।
रूह तक जलती है जब नाम तेरा ले लेते,
दिल के ज़ख़्मों को ये मरहम भी सजाते नहीं।
तेरी बातों का असर दिल पे उतर जाता है,
तेरी ख़ामोशी को हम लोग समझ पाते नहीं।
हमने चाहा कि तुझे भूल भी जाएँ लेकिन,
दिल की आदतें बदलने से बदल पाते नहीं।
तेरी आँखों के इशारों पे जो रुक जाएँ,
उनकी मंज़िल से वो रस्ते कभी जाते नहीं।
जिस तरह चाँद की क़शिश है समंदर के लिए,
उस तरह तेरी मोहब्बत से बच पाते नहीं।
तेरी आँखों में जो अश्क़ों का समंदर ठहरा,
उसमें डूबे बिना जीने के मज़े आते नहीं।
तेरी चाहत में ही गुज़री है ये सारी उम्रें,
अब किसी और से रिश्ता हमें भाते नहीं।
तेरी आँखों का समंदर ही है इक आख़िरी सच,
तेरे दरिया से गुज़रकर भी किनारे आते नहीं।
मक़ता:
तेरे अफ़साने लिखता हूँ मैं, दामन है ख़ाली-खाली,
क़बीर के साये में अब और मुद्दे भाते नहीं।
ख़ातिमा:
“ग़ज़ल: मोहब्बत के साए” का हर शेर मोहब्बत की उस रूहानी दुनिया का हिस्सा है, जहाँ जज़्बात लफ़्ज़ों से कहीं ज़्यादा असर डालते हैं। इसमें तन्हाई, ख़ामोशी और यादों का जो संगम है, वह दिल को छूकर रूह में उतर जाता है। मक़्ता में शायर ने अपने नाम को खूबसूरती से पिरोकर ग़ज़ल को मुकम्मल अंजाम दिया है, जिससे यह और भी यादगार बन जाती है। यह ग़ज़ल न सिर्फ़ महफ़िलों और मशायरों के लिए मुनासिब है बल्कि पढ़ने वाले के दिल में भी गहरी छाप छोड़ने वाली है। मोहब्बत की दुनिया में उतरने का यह सफ़र हर दिल को अपनी गिरफ़्त में ले लेता है और सुनने वाले को मोहब्बत के सायों में डुबो देता है।
कठिन उर्दू शब्दों केआसान हिंदी मायने:
तआर्रुफ़ = परिचय, पहचान, ग़ज़ल = शायरी की विधा, इश्क़ व भावनाओं का बयान, जज़्बात = भावनाएँ, एहसास, नज़ाकत = कोमलता, नर्मी, आईना = शीशा, दर्पण, तड़प = बेचैनी, व्याकुलता, तल्ख़ी = कड़वाहट, सख़्ती, असर = प्रभाव, असरदारी, अहल-ए-ज़ौक़ = शौक़ीन लोग, रसिक लोग, ग़ज़ब = अद्भुत, कमाल, सहारा = आसरा, मदद, शफ़्फ़ाफ़ = बिल्कुल साफ़, निर्मल, मरहम = चोट का इलाज, मरहम-पट्टी, इशारे = संकेत, इशारा करना, क़शिश = खिंचाव, आकर्षण, अश्क़ = आँसू, दरिया = नदी, समंदर, अफ़साने = किस्से, कहानियाँ, दामन = आँचल, झोली, जीवन का विस्तार, ख़ाली = सूना, रिक्त, ख़ातिमा = अंत, निष्कर्ष, रूहानी = आध्यात्मिक, आत्मिक, संगम = मिलन, संगति, मुकम्मल = पूरा, सम्पूर्ण, महफ़िल = सभा, गोष्ठी, मशायरा = शेर-ओ-शायरी की गोष्ठी, कवि सम्मेलन, छाप = निशान, प्रभाव, गिरफ़्त = पकड़, क़ाबू
