तआर्रुफ़:
“ग़ज़ल: सफ़र-ए-इश्क़” मोहब्बत और रूहानी एहसास की खूबसूरत तसवीर है। इसमें इश्क़ की तन्हाई, चाहत की रौशनी और जुदाई की तल्ख़ियाँ बड़ी नफ़ासत से बयान की गई हैं। हर शेर दिल की गहराई से निकले जज़्बात का आईना है। इस ग़ज़ल में मोहब्बत को एक सफ़र बताया गया है, जिसमें तन्हाई भी है और सुकून भी। शायर ने चाहत को नूर-ए-हयात, सब्र का पैग़ाम और रूह का सहारा कहा है। यह ग़ज़ल दिल की धड़कनों और अहसासात का ऐसा संगम है, जो मोहब्बत करने वालों के दिल में उतर जाता है। “कबीर” के अल्फ़ाज़ मोहब्बत की पाक सच्चाई और इश्क़ की रूहानी ख़ुशबू का अहसास कराते हैं।
ग़ज़ल: सफ़र-ए-इश्क़
मतला
सफ़र-ए-इश्क़ में रस्ता बड़ा तन्हा था,
मगर तुझको मिला तो जहाँ अपना था।
तेरी चाहत से मिली रूह को वो नूर-ए-हयात,
तेरे सायों ने ही तन्हाइयों को सँभाला था।
तेरे अहसास ने बख़्शा मुझे साहिल का सुकून,
वरना हर सम्त समुंदर का किनारा था।
तेरी तस्वीर में मिलती है मुझे जन्नत भी,
तेरे नक़्शों में लिखा सब्र का सहारा था।
रात की तन्हाइयों में तेरा ही चेहरा देखा,
चाँदनी ने भी कहा, तू मेरा नज़ारा था।
तेरी आँखों की शरारत ने मुझे ज़िंदा रखा,
तेरे लबों पे जो हँसी थी, वही तो गुज़ारा था।
तेरी धड़कन ने मेरी साँसों को असर बख़्शा,
तेरे होने से ही दुनिया का ये सारा नज़ारा था।
तेरी ख़ुशबू से महक उठी थी मेरी तन्हाई,
हर गली, हर कूचा तेरा ही उजियारा था।
तेरी बातों से मिला सब्र का पैग़ाम मुझे,
तेरी ख़ामोशी में छुपा रब का इशारा था।
तेरे वादों में मिली रूह को सुकून-ए-अबदी,
तेरे मिलने का हर अंदाज़ अनोखा नज़ारा था।
तेरी बातों से सँवर जाते थे वीरान ख़याल,
तेरा लहजा ही मेरे दिल का सहारा था।
मक़ता
“कबीर” कहता है, तेरे बिन अधूरी थी हर दुआ,
तेरे होने से ही हर लम्हा रोशन सहारा था।
ख़ातिमा:
“ग़ज़ल: सफ़र-ए-इश्क़” इश्क़ की हक़ीक़त और जज़्बात का रूहानी पैग़ाम है। इसमें चाहत की मिठास, तन्हाई का बोझ और यादों की गर्मी बख़ूबी पिरोई गई है। हर शेर मोहब्बत की गहराई को नए रंग में बयान करता है। शायर ने अपनी ग़ज़ल में दिखाया है कि मोहब्बत सिर्फ़ एक जज़्बा नहीं, बल्कि रूह का सफ़र है जो इंसान को सब्र, सुकून और तसल्ली देता है। इस ग़ज़ल का मक़्ता मोहब्बत की पराकाष्ठा को छूता है, जहाँ दुआएँ भी अधूरी थीं मगर महबूब के होने से सब कुछ मुकम्मल हो गया। यह ग़ज़ल उन दिलों के लिए है जो इश्क़ की रौशनी में अपनी तन्हाईयों को सँभालते हैं।
